Saturday, 26 March 2022

खास बात

 


आज अमरत पीला दो ऐ मेरे सनम।

इंतजार कर रहा, बीते  कई जनम।

जहर पी मुकम्मिल रे  पचा डाला, 

अस्क देख दिल न डोलता सनम।।


ख़्वाबों में नहीं,

ख़्वाजा की दरगाह चल।

है सामने तो हाथ रहा है मल।

पनाह आगोश की ले, 

दीवार कहाँ?

लम्हा लम्हा गुजरा,

 बहाना- आज नहीं कल।।


डस लिया नागन, क्या करूँ?

मत खोलता आगल, दवा कहूँ?


कहानी कह न फुसला,

गहरा असर चाहिये।

जुवानी न और सुना,

सचमुच कजा चाहिये।।


डॉ. कवि कुमार निर्मल

ख्वाब

 


  •  【१】
  • आज अमरत पीला दो ऐ मेरे सनम।
  • इंतजार कर रहा, बीते  कई जनम।
  • जहर पी मुकम्मिल रे पचा डाला, 
  • अस्क देख दिल न डोलता सनम।।
  • 【२】
  •  

  • ख़्वाबों में नहीं ख़्वाजा की दरगाह चल।
  • है सामने तो हाथ रहा है मल।
  • पनाह आगोश की ले, दीवार कहाँ,
  • लम्हा लम्हा गुजारा - बहाना आज नहीं कल।।

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  • के० के०
  •              डॉ. कवि कुमार निर्मल